"वफा" की रस्म निभाने कोई नही आता,
"घर" पड़ोसी का बचाने कोई नही आता,
"जला" चिराग बुझाने तो लोग आते हैँ,
"बुझा" चिराग जलाने कोई नही आता।
हर किसी को खुश रख सकूँ,
वो तरीका मुझे नहीं आता..
जो मैं नहीं हूँ वैसा दिखने का,
सलीका मुझे नहीं आता ।।
Kuch Khass Nahi Bus Itni Si Mohabbat Hai Meri,
Har Raat Ka Akhri Khayal,
Har Subah Ki Pehli Soch Tum Ho...
मैं झुक गई तो वो सज़दा समझ बैठे;
मैं तो इन्सानियत निभा रही थी,
वो खुद को ख़ुदा समझ बैठे।
चेहरों में दूसरों के तुझे ढूँढ़ते रहे ,
कहीं सूरत नहीं मिली कहीं सीरत नहीं मिली.....
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उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्ज़ुब कैसा..
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है..
दुनिया का सबसे बेहतरीन रिश्ता वहीं होता है,
जहाँ एक हल्की सी मुस्कराहट और छोटी सी माफ़ी से
ज़िन्दगी दोबारा पहले जैसी हो जाती है।