Friday, 31 October 2014

"वफा" की रस्म निभाने....

"वफा" की रस्म निभाने कोई नही आता,
"घर" पड़ोसी का बचाने कोई नही आता, "जला" चिराग बुझाने तो लोग आते हैँ,
"बुझा" चिराग जलाने कोई नही आता।

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हर किसी को खुश रख सकूँ....

हर किसी को खुश रख सकूँ,
वो तरीका मुझे नहीं आता.. जो मैं नहीं हूँ वैसा दिखने का,
सलीका मुझे नहीं आता ।।

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Thursday, 23 October 2014

Kuch Khass Nahi...

Kuch Khass Nahi Bus Itni Si Mohabbat Hai Meri,

Har Raat Ka Akhri Khayal, 

Har Subah Ki Pehli Soch Tum Ho...



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मैं झुक गई तो......

मैं झुक गई तो वो सज़दा समझ बैठे;

मैं तो इन्सानियत निभा रही थी, 

वो खुद को ख़ुदा समझ बैठे।

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Monday, 20 October 2014

चेहरों में दूसरों के....


चेहरों में दूसरों के तुझे ढूँढ़ते रहे ,

कहीं सूरत नहीं मिली कहीं सीरत नहीं मिली.....

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Sunday, 19 October 2014

उसने महबूब ही तो.........


उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्ज़ुब कैसा..


दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है..

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Saturday, 18 October 2014

दुनिया का सबसे...


दुनिया का सबसे बेहतरीन रिश्ता वहीं होता है, 

जहाँ एक हल्की सी मुस्कराहट और छोटी सी माफ़ी से 

ज़िन्दगी दोबारा पहले जैसी हो जाती है।


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