सुबह के तख़्त नसीन , शाम को मुजरिम ठहरे...,
हमने पल-भर में नसीबों को बदलते देखा..!!!
आज कुछ कमी सी है तेरे बगैर;
ना रंग ना रौशनी है तेरे बगैर;
वक़्त अपनी रफ़्तार से चल रहा है;
बस धड़कन थम सी गयी है तेरे बगैर।
नहीं सजदे किये हमने कभी गैरों की चौखट पर
हमें जिस की ज़रुरत हो खुदा से मांग लेते हैं...
आज हम हैं,कल हमारी यादें होंगी..
जब हम ना होंगे,तब हमारी बातें होंगी..
कभी पलटो गे जिंदगी के ये पन्ने..
तो शायद आप की आँखों से भी बरसातें होंगी..
तुम ये मत समझना के मुझे कोई और नहीं चाहता !
मौत तो तुमसे पहेले ही हमसफ़र बन बैठी है ...
मरने वाले को रोने वाले हजार मिल जायेंगे मगर,,
जो जिंदा है उसे समजने वाला एक भी नही मीलता...
तुम दिल से हमे यूँ पुकारा न करो,
यूँ तुम हमे इशारा किया न करो.,
दूर है तुमसे ये मज़बूरी है हमारी,
तुम तन्हाइयो में हमे यूँ तडपाया न करो..