मैं बददुआ तो नहीं दे रही हूँ उसको मगर,
दुआ यही है उसे मुझसा अब कोई न मिले।
वो "दोस्त" मेरी नजरो मे बहोत माईने रखते,
जो वक़त आने पर मेरे सामने, "आइने" रखते है..!
तमन्ना दिल की एक हसरत है,
पूरी हो जाये तो इन्सान खुश किस्मत है,
ना पूरी हो तो गम न करना,
क्योंकि अधूरी रहना तो तमन्नाओं की फितरत है।
कुछ दिनों अपनी यादों से रिहाई दे दो""
मुहब्बत के साथ - साथ दुनियादारी भी तो निभानी है""
मुश्किल है दौर इतना और उम्र थक गई,
अब किससे जाकर पुछे मंजिल किधर गई,
बाजार मे पूछी थी ईन्सानियत मिलेगी?
सबने हँसते हुए कहा वह तो कब की मर गई।
"तेरे ख़त आज लतीफ़ों की तरह लगते हैं,
खूब हंसती हूँ जहाँ लफ़्ज़-ए-वफ़ा आती है...
कोई हालात नही समझता ,
तो कोई जज्बात नही समझता..
कोई कोरा पन्ना पढ़ लेता है ,
तो कोई पूरी किताब नही समझता ....