कुछ पल जो बीते अपने दोस्तों के साथ, कुछ यादगार लम्हे जो याद आये तो आँख भर आये, कुछ मीठा मीठा दर्द जो दे खुशियां हज़ार,
Monday, 29 September 2014
"दीदार की 'तलब' हो तो
"दीदार की 'तलब' हो तो नज़रे जमाये रखना 'ग़ालिब'
क्युकी, 'नकाब' हो या 'नसीब'...........सरकता जरुर है

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